शादी के जाल में फंसाकर राजस्थान के एक परिवार को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर बुलाकर झूठी शादी और पुलिस बनकर ठगी करने की घटना में शामिल मुख्य किरदार लुटेरी दुल्हन की पहचान के लिए पुलिस कथित मौसी और बिचौलिए के सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) को खंगाल रही है।
इसकी मदद से पुलिस राजस्थान के उस बिचौलिए तक पहुंचेगी, जिसकी मदद से गोरखपुर में युवती को फर्जी शादी के लिए तैयार किया गया था। पुलिस का दावा है कि जल्द ही वांछितों की गिरफ्तारी होगी।
इस पूरे मामले में राजस्थान के परिवार को बुलाने वाले हरियाणा के राजू से राजस्थान की एक महिला से भी बातचीत हुई थी। उसी महिला की मदद से राजस्थान के परिवार से संपर्क हुआ था तो राजू से ही कथित मौसी की जरिए एक युवती की तलाश की थी। अब युवती कौन है, इसकी जानकारी न तो कथित मौसी से ही साफ साफ मिल पाई और न ही राजू से ही पुलिस को कुछ खास मिला।
अब पुलिस की निगाह इन दोनों के मोबाइल कॉल डिटेल पर टिक गया है, जिसकी मदद से उस युवती की पहचान की जा सके। दूसरे, पुलिस को इतनी जानकारी मिली कि युवती एम्स इलाके के सोनबरसा में कहीं किराये पर रहती थी। मकान मालिक तक पुलिस पहुंचने की जुगत में लगी है।
यह हुआ था
कोटा के मुकेश मीणा अपने भाई ब्रहमोहन मीणा की शादी खोज रहे थे। उनकी मुलाकात हरियाणा के रहने वाले राजू शर्मा से हो गई। उसने गोरखपुर की तीन लड़कियों का फोटो भेजा और एक फोटो पसंद आने पर शादी तय करा दी। राजू 12 मार्च को कोटा के परिवार को लेकर गोरखपुर आया। यहां पर हिस्ट्रीशीटर अंकुर सिंह के घर पर कथित मौसी शैला देवी शादी के लिए एक लड़की को लेकर आई और जयमाल करा दिया गया। जयमाल होते ही अंकुर सिंह दरोगा बनकर अपने तीन लोगों को सिपाही और होमागर्ड बताते हुए पहुंच गया। फर्जी आईकार्ड दिखाया और पूरे परिवार को गलत तरीके से शादी की धमकी देकर बंधक बना लिया और फिर जेल भेजने की धमकी देते हुए लूटपाट की थी। जांच में पता चला कि शैला 20 हजार लेकर फर्जी मौसी बनी थी तो बहन बनी युवती ने 15 हजार रुपये लिए थे। गत 13 मार्च को हुई इस घटना में पीड़ित परिवार ने कोटा शहर में जीरो एफआईआर दर्ज कराई थी, जहां से केस गोरखपुर के चिलुआताल थाने में ट्रांसफर किया गया।
ऐसे बनाई थी फर्जी पुलिस टीम
अंकुर दरोगा बना था और धीरेंद्र को हेड कांस्टेबल, मुन्ना को कांस्टेबल और नवमी को होमगार्ड बनाया था। फर्जी टीम इस तरह से बनाई गई थी कि कदकाठी से लोगों को यकीन हो जाए। दूसरे आरोपियों के पास एक डंडा था, जो देखने से पुलिस वालों का लग रहा था। आरोपियों ने फर्जी आईकार्ड दिखाकर भरोसा दिलाया था कि वे असली पुलिस वाले ही हैं। आरोपी राजू पहले अंकुर का ड्राइवर रह चुका है।
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