शास्त्री नगर सेंट्रल मार्केट प्रकरण में अवैध निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रवैया सख्त बना हुआ है। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने गुरुवार को मामले की सुनवाई करते हुए आवास एवं विकास परिषद को दो माह में इमारतों में सेटबैक की जगह किए गए अवैध निर्माण को तोड़ने का आदेश दिया।
अदालत ने कहा कि नोटिस जारी कर भवन मालिकों को सेटबैक खाली करने के लिए 10 से 15 दिन का समय दिया जाए। इसके बाद परिषद ध्वस्तीकरण करे और इस कार्रवाई में होने वाले खर्च को भवन मालिकों से वसूले। यह प्रक्रिया दो महीने में पूरी करनी होगी।
सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को जैसे ही सुनवाई शुरू हुई, आवास एवं विकास परिषद के अधिवक्ता राजीव शकधर ने कोर्ट में सीलिंग की कार्रवाई की रिपोर्ट पेश किया। रिपोर्ट के साथ प्रत्येक इमारत की सीलिंग से पहले और बाद की तस्वीर भी लगाई गई थी।
सुनवाई के दौरान सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों के लिए राहत की एक किरण भी दिखाई दी। भू-उपयोग परिवर्तन का मामला उठाने पर शीर्ष अदालत ने कहा कि पूरी योजना का विवरण पीठ के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।
इसके बाद हम विचार करेंगे। सुनवाई के समय आवास एवं विकास परिषद के अध्यक्ष पी गुरुप्रसाद अदालत में आनलाइन उपस्थिति रहे। अदालत ने दो माह में सभी इमारतों के सेटबैक एरिया में हुए अवैध निर्माण को तोड़कर उसे खाली कराने का आदेश दिया। हालांकि कोर्ट का आदेश अभी अपलोड नहीं हुआ है। मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई को होगी।
देश के लिए आंख खोलने वाला है यह मामला
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश स्टेट मशीनरी के संबंध में यह याचिका आंख खोलने वाली है, न सिर्फ उत्तर प्रदेश के लिए बल्कि पूरे देश के लिए। अगर जिम्मेदार अधिकारियों ने सही समय उचित कार्रवाई की होती तो ऐसी स्थिति सामने नहीं आती।
कोर्ट रूम लाइव : बैंकों और स्कूलों को सामान निकालने का मिले समय
आवास विकास परिषद के अधिवक्ता राजीव शकधर : बुधवार को 44 संपत्तियों में शामिल व्यावसायिक कांप्लेक्स, छह स्कूल, छह अस्पताल, चार बैंक्वेट हाल और तीन बैंकों की इमारत को सील कर दिया गया है। बैंकों के लाकर को भी दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया। अस्पतालों के मरीजों को दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट कर दिया गया है। स्कूल के विद्यार्थियों को भी शिफ्ट किया जा रहा है।
कोर्ट : ठीक है आपने 44 निर्माणों को सील कर दिया। शेष अवैध निर्माणों को लेकर आपकी क्या योजना है।
शकधर : प्रत्येक इमारत में सेटबैक की जगह पर हुआ निर्माण पूरी तरह अवैध है। आवास एवं विकास परिषद की ओर से कई अवैध निर्माणों में लाल निशान लगाने की कार्रवाई की गई है। बड़ी संख्या में लोगों ने पहली और दूसरी मंजिल पर निर्माण कर लिया है। जिसका कुछ भाग परिषद के नियमानुसार शमन योग्य भी है।
कोर्ट : दो माह में सभी इमारतों में सेटबैक छोड़ने के लिए उन पर बने अवैध निर्माण को तोड़ा जाए। पहले शमन की नियमावली प्रस्तुत की जाए, उसके बाद इस पर निर्णय लेंगे।
व्यापारियों के अधिवक्ता कन्हैया सिंघल : आवास एवं विकास परिषद ने व्यापारियों से भू-उपयोग परिवर्तन की बात कही थी। उस मद में व्यापारियों से शुल्क भी जमा कराया गया है।
कोर्ट : किसने शुल्क जमा करने के लिए कहा? आवास एवं विकास परिषद के पास जाइए और धनराशि वापस मांगिए।
शकधर : भू उपयोग परिवर्तन मद में शुल्क जमा हुआ है।
स्कूल संचालकों के अधिवक्ता संजय हेगड़े : स्कूलों को व्यावसायिक दर्जा देना गलत है।
कोर्ट : क्या स्कूल व्यावसायिक गतिविधियों में नहीं आते हैं? क्या स्कूल परिसर में अग्निशमन सुविधा है? क्या यह वैध निर्माण है?
हेगड़े : निर्माण वैध है पर पूर्णता प्रमाण पत्र नहीं है। स्कूल में सोलर प्लांट भी है।
कोर्ट : जमीन का आवंटन क्या स्कूल के लिए हुआ था? स्कूल संचालन के लिए लाइसेंस लिया गया था? आपको किसने आवासीय भूखंड के भू-उपयोग परिवर्तन की अनुमति दी?
शकधर : स्कूल जिस भूमि पर बने हैं, वह पूरी तरह आवासीय है।
कोर्ट : आवासीय भूमि पर स्कूल संचालन अवैध है। यह मामला मासूम बच्चों और मरीजों के जीवन से जुड़ा है। आप व्यापार कर रहे हैं, वह भी लोगों के जीवन की कीमत पर।
हेगड़े : अगर स्कूल संचालक स्वयं से सेटबैक छोड़ना चाहते हैं तो उसकी अनुमति दी जाए।
बैंक के वकील राघव शंकर : बैंक के तीन सौ लाकर को शिफ्ट करने के लिए अनुमति दी जाए।
कोर्ट : स्कूल और बैंक अपना फर्नीचर और सामान निकालने के लिए आवास एवं विकास परिषद से संपर्क करें। समय मिलेगा।
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