- कुटीर उद्योगों की हितेषी उत्तर प्रदेश सरकार ने छीनी 300 परिवारों की रोजी रोटी:ग्राम डुंगर मेरठ में चर्म उद्योग पर लगाई सील | दैनिक सच्चाईयाँ

Thursday, 16 April 2026

कुटीर उद्योगों की हितेषी उत्तर प्रदेश सरकार ने छीनी 300 परिवारों की रोजी रोटी:ग्राम डुंगर मेरठ में चर्म उद्योग पर लगाई सील

मेरठ:उत्तर प्रदेश की योगी सरकार जहाँ एक ओर दलितों के हित की बातें करती है और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए तरह-तरह की योजनाएं लाती रही है, वहीं दूसरी ओर सरकार का एक दूसरा चेहरा भी है जहाँ और डुंगर मेरठ में 100 वर्ष से चल रहे सहायता समूह के माध्यम से चर्मशोधन संस्थान (कुटीर उद्योग) जोकि लेदर के जूते, अपर,स्पोर्ट्स के सामान, हैंडपंप वर्शल घरेलू उद्योगों के माध्यम से बनाकर अपनी कारीगरी का कौशल कुटीर उद्योग के माध्यम से दिखाकर प्रदेश के व्यापार को बढ़ावा देकर अपनी रोजी-रोटी एवं परिवार का लालन पालन कर रहे थे सरकार के एक आदेश ने 300 परिवारों की रोजी-रोटी छीन ली सरकार ने मेरठ में 100 वर्षों से चल रहे स्वयं सहायता समूह में हापुड़िया लेदर प्रोसेसिंग स्वयं सहायता समूह चर्म शोधन संस्थान ग्राम डुंगर 

मेरठ को उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 13 वर्ष पुराने आदेश पर बिना किसी पूर्व सूचना के सिलकर 300 अनुसूचित जाति के परिवारों की रोजी-रोटी एक ही झटके में छीन ली गई जहां आजकल सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के चलते शास्त्री नगर प्रकरण सुर्खियों में है और 40000 व्यक्तियों की रोजी रोटी पर खतरा भंडारा आ रहा है वहीं सरकार ने इन 300 एस.सी परिवारों को भुखमरी की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है। इसी कारोबार से जुड़े एक पीड़ित ने बताया कि सरकार अपनी कार गुजारियो को छिपाने के लिए सहायता समूह चर्म शोध संस्थान के निर्माण के समय हुए व्याप्क भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए इन गरीबों दलितों से जुड़े चरम व्यापार को बंद कर दिया गया। पीड़ित परिवारों का कहना है कि चर्म शोधन संस्थान हेतु सरकार द्वारा जो धनराशि आवंटित की गई थी उसकी बंदर बांट का खामियाजा दलित परिवारों को भुगतना पड़ रहा है यदि उसे धन का सही उपयोग हुआ होता और ETP का समय से निर्माण किया होता तो आज ETP नहीं लगा होने के कारण इस प्लांट को सील नहीं किया जाता। पीड़ित ने यह भी बताया कि ज़ब प्लॉट बंद होने से रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया वहीं दूसरी और आज तक की सभी जमा पूंजी का कच्चा माल जिसकी अनुमानित लागत 3 करोड रुपए के आसपास है वह भी संस्था के साथ अंदर ही सील कर दी गई पीड़ित ने यह भी बताया कि प्रोसेसिंग के समय लाइम पिट में डाल रखा था वह दो-तीन दिन मे सड़कर बर्बाद हो जाएगा सरकार की इस कारगुजारी से जहां एक और 300 परिवारों की रोजी-रोटी पर खतरा खड़ा हो गया वही कई लोग कर्ज के बोज तले दबकर बर्बाद होने की कगार पर खडे है। सरकार शास्त्री नगर के मामलों में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों से बंधी है और कुछ भी करने में असमर्थ है।मगर ग्राम डुंगर के मामले मे सरकार के आगे इन 300 एस. सी परिवारों को बचाने से कोई बंदिश नहीं है यदि सरकार चाहे तो इन्हें तुरंत सहायता पहुंच सकती है। ग्राम डुंगर के पीड़ित परिवारो की निगाहेँ सरकार की और टकटकी लगाए हैं।

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