थायरॉयड रोगों और कैंसर के बढ़ते मामलों के बीच मैक्स इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर केयर में एक अत्यंत दुर्लभ और जटिल रोबोटिक सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। थायरॉयड ग्लैंड में ट्यूमर की समस्या से ग्रस्त 32 वर्षीय बिनीता का उपचार रोबोटिक स्कारलेस टोटल थायरॉयडेक्टॉमी विद सेंट्रल नेक डिसेक्शन तकनीक से किया गया।
द विंची रोबोटिक सिस्टम से हुई सर्जरी
पारंपरिक थायरॉयड सर्जरी में गर्दन पर बड़ा निशान पड़ने की संभावना रहती है, जो कई मरीजों के लिए मानसिक और सामाजिक असहजता का कारण बनती है। इसी चिंता को ध्यान में रखते हुए बिनीता के लिए दा विंची रोबोटिक सिस्टम की मदद से ट्रांसएक्सिलरी यानी बगल के रास्ते से ऑपरेशन किया गया। इस प्रक्रिया में गर्दन पर कोई चीरा नहीं लगाया जाता और बगल में दिया गया छोटा चीरा समय के साथ लगभग अदृश्य हो जाता है। डॉ. सीमा सिंह ने बताया कि स्कारलेस रोबोटिक थायरॉयडेक्टॉमी तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण है, लेकिन यह मरीजों को कम दर्द, कम रक्तस्राव, तेज़ रिकवरी और बिना किसी बाहरी निशान के इलाज का विकल्प प्रदान करती है। इससे उनकी जीवन गुणवत्ता और आत्मविश्वास दोनों बेहतर होते हैं।
पूरे भारत में केवल 12ndash;15 अनुभवी सर्जन
यह उन्नत सर्जरी चिकित्सा जगत में अत्यंत जटिल मानी जाती है और पूरे भारत में केवल 12ndash;15 अनुभवी सर्जन ही इस प्रक्रिया को सुरक्षित रूप से करने में सक्षम हैं। इस सफल सर्जरी ने मैक्स वैशाली को रोबोटिक कैंसर सर्जरी के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान दिलाई है। इस प्रक्रिया का नेतृत्व डॉ. सीमा सिंह, एसोसिएट डायरेक्टर, रोबोटिक ऑनकोसर्जरी (ब्रेस्ट एवं गायनी यूनिट) ने किया। डॉ. सिंह आईएमएस, बीएचयू से एमबीबीएस और एमएस (गोल्ड मेडलिस्ट) समेत एम्स, नई दिल्ली से एमसीएच (सर्जिकल ऑन्कोलॉजी) कर चुकी हैं। उन्होंने साउथ कोरिया से एडवांस्ड रोबोटिक सर्जरी में फेलोशिप भी प्राप्त की है, जिससे वह देश की चुनिंदा विशेषज्ञों में शामिल हैं।
Post a Comment