- Uttrakhand:- मैम, आप बताओ मैं किस-किस को खुश करूं..., दून में डा. तन्वी आत्महत्या मामले में एचओडी संग ऑडियो हो रही वायरल | दैनिक सच्चाईयाँ

Friday, 27 March 2026

Uttrakhand:- मैम, आप बताओ मैं किस-किस को खुश करूं..., दून में डा. तन्वी आत्महत्या मामले में एचओडी संग ऑडियो हो रही वायरल

 

देहरादून। श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट आफ़ मेडिकल एंड हेल्थ साईंसेज की आत्महत्या करने वाली पीजी डाक्टर तन्वी व विभागाध्यक्ष डा. प्रिंयका गुप्ता के बीच बातचीत का एक आडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो रहा है।

आत्महत्या से पहले डा. तन्वी ने यह आडियो अंबाला में पिता ललित मोहन को भेजा। करीब आधे घंटे के इस आडियो में वह बहुत परेशान लग रही हैं।

डा. तन्वी कह रहीं हैं कि 'मैम, आप बताओ मैं किस-किस को खुश करूं और कैसे'। 'बताओ मैं क्या कर सकती हूं इसमें। मैंने तो ऐसा कुछ भी नहीं किया'।

डा. तन्वी यह भी कह रही है कि मैम क्लास कभी मिस नहीं की है मैंने, एक दिन की थी उस दिन थोड़ा कन्फूजन था। मैं किसी की लाइफ में इंटरफेयर नहीं करती हूं। डा. तन्वी ने मरने से पहले पिता ललित मोहन से एक घंटे बात की।

डा. ललित मोहन बताते हैं कि 24 मार्च की रात करीब नौ बजे तन्वी का फोन आया था। बेटी उदास लग रही थी। करीब एक घंटा बात की।

उसे समझाया कि शांत रहे। तन्वी यही कहे जा रहे थी- पापा अब सहन नहीं हो रहा। परेशान हूं। वह रिकार्डिंग अब मैनेजमेंट के सामने रखनी ही पड़ेगी। फिर उन्होंने कहा कि मैं कल आता हूं। फिर मैनेजमेंट के सामने बात रखेंगे।

डा. ललित मोहन ने बताया कि उनकी पत्नी के पास रात को करीब सवा 11 बजे तन्वी का मैसेज आया कि वह डेढ़ घंटे बाद घर पहुंचेगी। आमतौर पर तन्वी मां को फोन करती थी। ऐसे में मैसेज आने से मां की चिंता बढ़ गई।

उन्होंने पति ललित मोहन को फोन करके ये बात बताई। रात ढाई बजे पिता डा. ललित मोहन देहरादून पहुंचे तो देखा कि कार पार्किंग में नहीं थी।

बेटी की कार न देखकर पिता की चिंता और बढ़ी। वह अपनी गाड़ी लेकर इधर-उधर देखने निकले। पेट्रोल पंप की तरफ जा रहे थे तो बेटी की कार खड़ी देखी।

कार के अंदर बेसुद्ध पड़ी थी बेटी

उन्होंने बताया कि बेटी की कार देखकर वह पास पहुंचे। अंधेरा होने की वजह से मोबाइल की टार्च आन की और कार के अंदर झांका। अंदर बेटी ड्राइविंग सीट पर बेसुध पड़ी थी।

हाथ पर कैनुला लगा था और करीब 100 एमएल की बोतल लगी थी, जो खाली हो चुकी थी। पत्थर से शीशा तोड़कर बेटी को बाहर निकाला और उसी के मेडिकल कालेज अस्पताल लेकर गए, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।

पुलिस ने डीन व स्टाफ के दर्ज किए बयान

डा. तन्वी आत्महत्या मामले में पुलिस ने गुरुवार को डीन व मेडिकल स्टाफ के बयान दर्ज किए। इस दौरान विभागाध्यक्ष का डा. तन्वी के साथ व्यवहार व रहन-सहन के बारे में पूछताछ की गई।

हालांकि, अब तक पुलिस यह पता नहीं कर पाई कि उसने कैनुला बाहर से खरीदा या अंदर से ही लेकर आई थी। शनिवार को पुलिस अस्पताल के बाहर व घटनास्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरे चेक करेगी, इसके बाद कुछ साक्ष्य मिलने की संभावना है।

सीएमओ की निगरानी में बनेगी कमेटी, मेडिकल हिस्ट्री की होगी जांच

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेन्द्र सिंह डोबाल ने बताया कि मामला काफी संवेदनशील है। डीन ने डा. तन्वी की मेडिकल की कुछ हिस्ट्री दी है। ऐसे में सीएमओ की निगरानी में एक कमेटी गठित की जाएगी।

यह कमेटी जांच करेगी कि डा. तन्वी का कहां और किस चीज का उपचार चल रहा था। इस रिपोर्ट के आधार पर अगली कार्रवाई की जाएगी। एसएसपी ने बताया कि पोस्टमार्टम में शरीर में जहर की बात सामने आई है, ऐसे में विसरा सुरक्षित रखा गया है।

कालेज प्रशासन ने भी जताई विस्तृत जांच की आवश्यकता

श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल एंड हेल्थ साईंसेज की मेडिकल पीजी डा. तन्वी के आत्महत्या मामले में विवि प्रशासन ने विस्तृत जांच करवाने की आवश्यकता जताई है।

प्रशासन का कहना है कि परदे के पीछे ऐसा कोई हो सकता है, जो डाक्टर तन्वी की आत्महत्या की घटना पर गुमराह कर रहा हो। यह बात भी सोचने पर मजबूर करती है कि आत्महत्या से पहले डा. तन्वी या उनके माता-पिता ने कभी कोई लिखित शिकायत पुलिस, प्रशासन, एसजीआरआर विवि, वीसी कार्यालय, रजिस्ट्रार कार्यालय या मेडिकल कालेज प्रिंसिपल कार्यालय को कभी नहीं की।

डा. तन्वी का कोई सुसाइड नोट भी नहीं मिला है। नेत्र रोग विभाग की एचओडी डा. प्रियंका के रिश्ते भी सभी मेडिकल छात्र-छात्राओं के साथ मधुर हैं। इस बात की तस्दीक साथी छात्र-छात्राओं से बातचीत व पूछताछ में की जा सकती है।

ऐसे में अब डा. तन्वी की आत्महत्या को लेकर कई ऐसे सवाल तैर रहे हैं। अचानक एक ही दिन में ऐसा क्या हुआ, जो डा. तन्वी को आत्महत्या जैसा कदम उठाना पड़ा।

डा. तन्वी की लास्ट ड्यूटी जनरल ड्यूटी थी। सुबह करीब तीन बजे तन्वी को उनके माता पिता मृत अवस्था में इमरजेंसी में लेकर आए। इससे पहले की लोकेशन और सीसीटीवी फूटेज़ की जांच की भी आवश्यकता है।

कालेज प्रशासन ने एसएसपी को लिखा पत्र

इस मामले पर एसजीआरआर मेडिकल कालेज ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर पूरे घटनाक्रम से अवगत करवाया है। कालेज प्रशासन ने डा. तन्वी के मनोरोग उपचार के दस्तावेज और मेडिकल रिपोर्ट भी लगाकर दी हैं।

कालेज प्रशासन की मानें तो डा. तन्वी लंबे समय से मनोरोग का इलाज ले रही थीं। उन्होंने दो वर्ष पूर्व भी आत्महत्या का प्रयास किया था। उस समय आत्महत्या प्रयास के बाद डा. तन्वी को इलाज के लिए आइसीयू में भर्ती करना पड़ा था।

इस घटना की एमएलसी भी पुलिस ने रिसीव की थी। तब से तन्वी के माता-पिता घबराए हुए रहते थे। 31 दिसंबर 2025 की रात भी तन्वी ने आत्महत्या का प्रयास किया था। बार-बार तन्वी आत्महत्या की कोशिश क्यों करती थी, यह भी जांच का विषय है।

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