- UP:-वकील हत्याकांड में साढ़े 6 साल बाद फैसला | दैनिक सच्चाईयाँ

Monday, 6 April 2026

UP:-वकील हत्याकांड में साढ़े 6 साल बाद फैसला

एडवोकेट समीर सैफी हत्याकांड में दोषियों को सजा का आदेश लिखते समय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एफटीसी-3) रवि कुमार दिवाकर की कलम से वकीलों का दर्द भी चलका।

उन्होंने न सिर्फ युवा अधिवक्ता समीर के समय से पहले समाप्त हुए सपनों को लेकर पीड़ा व्यक्त की, बल्कि वारदात को रूल आफ ला पर हमला करार दिया।

सोमवार को न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने जब इस प्रकरण में सजा का आदेश सुनाया, तो वह वकीलों के दर्द से भरा हुआ था। क्योंकि वर्ष 2019 में 28 वर्ष के अधिवक्ता मोहम्मद समीर सैफी की हत्या कर दी गई थी।

'अधिवक्ता पर हमला नहीं, संस्था पर हमला है'

न्यायाधीश ने आदेश में लिखा कि यह केवल अधिवक्ता पर हमला नहीं, बल्कि एक संस्था पर हमले के समान है और सीधे चुनौती देने जैसा है। अधिवक्ता समाज में न्याय, लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों के संरक्षक के रूप में कार्य करते हैं, इसलिए अधिवक्ताओं को न्याय का प्रहरी भी कहा जाता है।

वह मौलिक अधिकारों की रक्षा, कमजोर वर्ग को कानूनी सहायता और विधि के शासन (रूल आफ लॉ) को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अधिवक्ता पर हमला न्यायपालिका के सुचारु काम-काज और विधि के शासन (रूल आफ लॉ) पर सीधा हमला है।

न्यायिक स्वतंत्रता और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है, क्योंकि अधिवक्ता न्याय प्रणाली की नींव है। एडवोकेट समीर सैफी की हत्या जैसी घटना समाज में भय, अराजकता और न्याय व्यवस्था के प्रति निराशा का संदेश देती है। जाहिर करती है कि अपराधी निडर हैं और कानून का इकबाल नहीं रह गया है।



युवा अधिवक्ता समीर सैफी की हत्या में सॉफ्ट जस्टिस अर्थात् कोमल न्याय करने से समाज में बहुत गलत संदेश जाएगा। क्योंकि समीर ने अभी तक जीवन को सही तरीके से देखा भी नहीं था। वह अपने सपनों के साथ आगे बढ रहा था, और अचानक सब कुछ खत्म हो गया।

कविता के माध्यम से व्यक्त की अधिवक्ताओं की आवाज-

कचहरी की सीढियों पर, आज सन्नाटा कुछ बोल रहा है

जहां दलीलों की गूंज थी कल, वहां खामोशी डोल रही है।

काला कोट जो ढाल बना था, सच की हर एक लड़ाई में

वो गिर पड़ा आज जमीन पर, झूठ की गहरी साजिश में।

कल तक जो कानून था जिंदा, हर जुर्म को आइना दिखाता था

आज उसी के रखवाले को, किसी ने बेरहमी से सुला डाला।

पर ये खून बेकार नहीं जाएगा, हर बूंद गवाही बन जाएगी

जो सच दबाने निकले थे, उनकी साजिश जल जाएगी।

क्योंकि हर वकील की सांसों में, एक अदालत बसती है

और मर कर भी वकील की आवाज, इंसाफ ही रचती है।

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