दिल्ली में मानसून के बीच स्वाइन फ्लू यानी H1N1 इंफेक्शन ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है. राजधानी में अब तक H1N1 के 2308 मामले सामने आ चुके हैं. इसके साथ ही दिल्ली में कुल इन्फ्लुएंजा मामलों की संख्या करीब 3000 तक पहुंच गई है. कुछ कोविड के नए केस भी सामने आए हैं. ऐसे में दिल्ली सरकार ने इमरजेंसी रिव्यू मीटिंग की है. सरकार ने लोगों से घबराने के बजाय सावधानी बरतने और खासकर भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनने की सलाह दी है.
ICMR के डायरेक्टर राजीव बहल ने मंगलवार (25 अगस्त) को बताया कि फ्लू के लगभग 650 मामले भी दर्ज किए गए हैं. दिल्ली का स्वास्थ्य विभाग लगातार स्थिति पर नज़र रख रहा है. राज्य सरकार का कहना है कि वह इस बीमारी से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क और तैयार है. रेखा गुप्ता सरकार ने बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी तैयारियां पूरी कर ली हैं, साथ ही लोगों से स्वाइन फ्लू से बचाव के उपाय करने की अपील की गई है.
पिछले साल के मुकाबले कई गुना बढ़े मामले
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में इस साल H1N1 संक्रमण तेजी से बढ़ा है. 20 अगस्त तक राजधानी में H1N1 के 1,777 मामले दर्ज किए गए थे. इसी अवधि में पिछले साल यह संख्या सिर्फ 229 थी. यानी मामलों में छह गुने से ज्यादा की वृद्धि हुई थी. 20 अगस्त को ही 114 नए H1N1 संक्रमण सामने आए थे. इसके अलावा दिल्ली में कुल 2,392 इन्फ्लुएंजा-A और 210 इन्फ्लुएंजा-B के मामले दर्ज किए गए थे. अब 25 अगस्त तक उपलब्ध ताजा आंकड़ों में H1N1 का आंकड़ा बढ़कर 2308 पहुंच गया है. स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह के मुताबिक, राजधानी में करीब 3,000 इन्फ्लुएंजा केस सामने आए हैं. अस्पतालों में मरीजों के इलाज की पर्याप्त व्यवस्था है.
क्या दिल्ली में कोई नया खतरनाक वायरस फैला है?
H1N1 के मामलों में अचानक आई तेजी ने लोगों के बीच यह सवाल खड़ा कर दिया है कि कहीं कोई नया या ज्यादा खतरनाक वायरस तो नहीं फैल रहा. हालांकि, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद यानी ICMR ने स्पष्ट किया है कि भारत में H1N1 का कोई नया स्ट्रेन सामने नहीं आया है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, फिलहाल फैल रहा वायरस पहले से मौजूद मौसमी इन्फ्लुएंजा वायरस है. इसमें ऐसा कोई बदलाव नहीं मिला है, जिससे इसे नया या ज्यादा घातक स्ट्रेन माना जाए.
ICMR के मुताबिक, भारत में प्रमुख रूप से A/Missouri/11/2025 (H1N1) pdm09-like वायरस स्ट्रेन सर्कुलेट कर रहा है. यह वायरस 2025 से ही मौजूद है और उत्तरी गोलार्ध के लिए सुझाए गए फ्लू वैक्सीन स्ट्रेन से अच्छी तरह मेल खाता है.
बच्चों और बुजुर्गों को ज्यादा खतरा
डॉक्टरों के मुताबिक H1N1 संक्रमण किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है, लेकिन बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों में इसके गंभीर रूप लेने का खतरा ज्यादा रहता है. कुछ मरीजों में संक्रमण निमोनिया और सांस से जुड़ी गंभीर समस्या पैदा कर सकता है.
इन लक्षणों को न करें इग्नोर
अगर किसी व्यक्ति को लगातार तेज बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर में दर्द, अत्यधिक थकान या सांस लेने में परेशानी हो रही है तो इसे सामान्य वायरल समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. खासकर हाई-रिस्क ग्रुप के लोगों को लक्षण बढ़ने का इंतजार नहीं करना चाहिए और डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.
सरकार ने जारी की एडवाइजरी
- खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकने, साबुन और पानी से बार-बार हाथ धोने तथा सांस संबंधी संक्रमण वाले लोगों से करीबी संपर्क से बचने को कहा गया है.
- लोगों को आंख, नाक और मुंह को बार-बार छूने से बचने, सार्वजनिक जगहों पर न थूकने और पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की सलाह भी दी गई है.
- अगर किसी व्यक्ति में फ्लू जैसे लक्षण हैं, तो उसे दूसरों से दूरी बनाए रखने और डॉक्टर की सलाह लेने को कहा गया है. खुद से दवा लेने से बचने की सलाह भी दी गई है.
35 अस्पतालों पर खास नजर
दिल्ली सरकार ने अस्पतालों की तैयारियों को भी मजबूत किया है.राजधानी के 35 अस्पतालों को विशेष निगरानी में रखा गया है. H1N1 की जांच और निगरानी के लिए AIIMS और नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल यानी NCDC की लैब को रेफरल लैब के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है. सरकार ने मरीजों की कैटेगरी, इलाज, होम केयर, वेंटिलेटरी सपोर्ट और मास्क के इस्तेमाल से जुड़े तकनीकी दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं.
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