- आरक्षण-विरोधी आवाज़ें हुई तेज़! जंतर-मंतर से सड़कों तक प्रदर्शन, करणी सेना ने खाई वोट न देने की कसम | दैनिक सच्चाईयाँ

Thursday, 6 August 2026

आरक्षण-विरोधी आवाज़ें हुई तेज़! जंतर-मंतर से सड़कों तक प्रदर्शन, करणी सेना ने खाई वोट न देने की कसम

 



भारत में जाति-आधारित आरक्षण को लेकर राजनीति और समाज में एक बार फिर तीखी बहस छिड़ गई है। देश में ऑनलाइन अभियानों से लेकर ज़मीनी स्तर तक आरक्षण-विरोधी आवाज़ें तेज़ी से संगठित और मुखर हो रही हैं।नीट (NEET) पेपर लीक पर टीवी डिबेट में जाति-आधारित व्यवस्था के खिलाफ बोलने वाले युवा हर्ष दुबे के सोशल मीडिया पर हज़ारों फॉलोअर्स बन चुके हैं और वे अब नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति का इंतज़ार कर रहे हैं। यह घटना अकेली नहीं है, पिछले कुछ हफ्तों में घटीं कई घटनाओं से साफ संकेत मिलता है कि आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ एक व्यापक और जन-असंतोष की भावना उभर रही है।

पिछले कुछ हफ़्तों में, कई ऐसी घटनाएं हुई हैं जो आपस में जुड़ी हुई नहीं लगतीं, लेकिन इनसे एक व्यापक भावना के उभरने का संकेत मिलता है। ऑनलाइन, आरक्षण-विरोधी अभियान को एक मज़बूत आधार मिला है। 'रिज़र्वेशन हटाओ आंदोलन' (RHA) का इंस्टाग्राम पेज, जो CJP विरोध प्रदर्शनों के कमज़ोर पड़ने के साथ तेज़ी से लोकप्रिय हुआ, अब उसके लगभग 5.9 मिलियन फ़ॉलोअर्स हैं। यह पेज जाति-आधारित आरक्षण के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा रहा है और इसे तर्कसंगत बनाने की मांग कर रहा है। RHA ने पिछले हफ़्ते महाराष्ट्र के नागपुर में अपना पहला ज़मीनी विरोध प्रदर्शन भी किया।कुछ दिनों बाद, जयपुर में राजपूतों के समूह 'श्री राजपूत करणी सेना' के सदस्यों का आंदोलन तनावपूर्ण हो गया। वे सड़कों पर उतर आए और UGC के जाति समानता नियमों (जिन पर अब रोक लगा दी गई है) को लेकर पुलिस से भिड़ गए। इस दौरान एक व्यक्ति की मौत का आरोप है। करणी सेना के नेताओं ने अपने पूजनीय देवताओं की कसम खाई है कि वे स्थानीय निकाय चुनावों में BJP को वोट नहीं देंगे।

इन सभी घटनाओं से पता चलता है कि आरक्षण-विरोधी आवाज़ें तेज़ हो रही हैं और ऑनलाइन व ऑफ़लाइन दोनों जगह समर्थकों को आकर्षित कर रही हैं। लेकिन यह आंदोलन बिखरा हुआ लगता है।

हर्ष दुबे जंतर-मंतर में प्रवेश करने और नेतृत्व करने का इंतज़ार कर रहे हैं। RHA इंटरनेट पर आरक्षण-विरोधी आवाज़ों को एकजुट कर रहा है। श्री राजपूत करणी सेना जयपुर की सड़कों पर अपनी लड़ाई लड़ रही है।लेकिन यह साफ़ है कि आरक्षण-विरोधी भावना पहले से कहीं ज़्यादा मज़बूत हो रही है। इसमें शिक्षाविद-लेखक आनंद रंगनाथन, पत्रकार-क्रिएटर अजीत भारती और लेखक-निर्देशक अनुराधा तिवारी जैसी प्रमुख हस्तियां शामिल हो रही हैं। ये सभी वेदांत नाम के एक छात्र द्वारा कुछ हफ़्ते पहले शुरू किए गए RHA प्लेटफ़ॉर्म से जुड़ रहे हैं। इन लोगों ने मांगों की एक सूची भी जारी की है।

हमेशा की तरह, राजनेता आरक्षण पर तेज़ी से गरमाती बहस से दूर रह रहे हैं। लेकिन ज़मीनी स्तर पर, सिर्फ़ श्री राजपूत करणी सेना और हर्ष दुबे ही ऐसे लोग नहीं हैं जो शिक्षा, नौकरियों और दूसरे क्षेत्रों में जाति-आधारित आरक्षण के ख़िलाफ़ लोगों को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं।

भारतीय डेयरी क्षेत्र का सबसे बड़ा IPO लाएगी Milky Mist, 10,778 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है मार्केट कै

इन्फ्लुएंसर, कमेंटेटर और जाने-माने बुद्धिजीवी आरक्षण के मुद्दे पर बंटे हुए हैं। कुछ लोग मौजूदा व्यवस्था को बनाए रखना चाहते हैं, कुछ इसे पूरी तरह खत्म करना चाहते हैं, जबकि कुछ लोग इसे तभी समर्थन देते हैं जब इसके लिए योग्यता के कड़े नियम हों।ऑनलाइन और ऑफलाइन, आरक्षण-विरोधी आवाज़ें लगातार तेज़ हो रही हैं। इस तेज़ी से भारत की सबसे ज़्यादा राजनीतिक रूप से संवेदनशील और समाज को बांटने वाली बहस-जाति-आधारित आरक्षण-के और फैलने का खतरा है। यह समय बहुत नाजुक है और इससे कई पक्ष प्रभावित हो सकते हैं।


Post a Comment

Whatsapp Button works on Mobile Device only

Start typing and press Enter to search

Do you have any doubts? chat with us on WhatsApp
Hello, How can I help you? ...
Click me to start the chat...