- लुधियाना: गुरु नानक भवन में पंजाब कांग्रेस का कार्यक्रम, सरेआम सामने आई अंदरूनी कलह और गुटबाजी | दैनिक सच्चाईयाँ

Thursday, 6 August 2026

लुधियाना: गुरु नानक भवन में पंजाब कांग्रेस का कार्यक्रम, सरेआम सामने आई अंदरूनी कलह और गुटबाजी

 



कार्यक्रम के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और भारत भूषण आशु गुट के समर्थकों तथा पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के समर्थकों के बीच तीखा तनाव पैदा हो गया। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि भारत भूषण आशु और सिमरजीत सिंह बैंस के समर्थकों के बीच एक बड़ा टकराव होते-होते बाल-बाल टल गया।

नारेबाजी से शुरू हुआ विवाद और 'आरएसएस' के नारे

कार्यक्रम की शुरुआत में जब भारत भूषण आशु के समर्थक- सन्नी भल्ला, पंकज शर्मा काका, इंद्रजीत इंडी और ईश्वरजोत चीमा समेत कई अन्य प्रमुख कार्यकर्ता आगे की पंक्तियों में बैठे थे, तभी प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग और अन्य वरिष्ठ नेता मंच पर पहुंचे।

मंच पर नेताओं के पहुंचते ही आशु समर्थकों ने अपने नेता भारत भूषण आशु के पक्ष में जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। आरोप है कि यह नारेबाजी राजा वड़िंग के समर्थकों को नागवार गुजरी, जिसके जवाब में तुरंत 'आरएसएस कार्यकर्ता बाहर जाओ' के नारे लगाए जाने लगे। आशु गुट के कार्यकर्ताओं ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए दो टूक कहा कि यदि इस तरह के अमर्यादित नारे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की मौजूदगी या उनकी ओर से लगाए जाते हैं, तो यह पार्टी के भीतर बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है।

ईश्वरजोत चीमा के आरोप: "राजा वड़िंग ने नहीं शांत कराई स्थिति"

इस पूरे घटनाक्रम पर सफाई देते हुए भारत भूषण आशु के करीबी नेता ईश्वरजोत चीमा ने कहा कि सभी कार्यकर्ता पूरी सद्भावना और अनुशासन के साथ कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। जब नेता सिमरजीत सिंह बैंस को मंच पर अपनी बात रखने के लिए माइक सौंपा गया, तो आशु समर्थकों ने केवल अपने नेता के समर्थन में सामान्य नारे लगाए थे। उन्होंने दावा किया कि किसी भी कार्यकर्ता ने छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल या प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग के खिलाफ एक भी गलत नारा नहीं लगाया था।

चीमा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बिगड़ते माहौल को शांत करने के बजाय राजा वड़िंग खुद भी नारेबाजी में शामिल हो गए, जिससे दोनों गुटों के कार्यकर्ताओं का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। हालांकि, माहौल को और अधिक बिगड़ने से बचाने के लिए आशु समर्थकों ने समझदारी दिखाते हुए खुद ही कार्यक्रम से बाहर जाने का फैसला किया, जिससे एक बड़ा राजनीतिक विवाद टल 

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