उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अभी काफी वक्त है। लेकिन, सभी सियासी दल अपनी-अपनी बिसात बिछाने में जुटे हैं। इसी कड़ी में, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।
लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी के लक्ष्य के साथ पार्टी अब संगठन, सामाजिक समीकरण और विधायकों की लोकप्रियता, तीनों स्तरों पर रणनीति बनाने में जुटी है। बीजेपी ने राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश का चुनाव प्रभारी बनाया है। उनके साथ जगदीश ईश्वरभाई पटेल (Jagdish Ishwarbhai Patel) को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है।
बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती करीब एक दशक की सत्ता के बाद पैदा होने वाली एंटी-इनकंबेंसी यानी 'सत्ता विरोधी लहर' से निपटना है। पार्टी के भीतर मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन और उनकी जमीनी पकड़ को लेकर समीक्षा की चर्चा तेज है। इसी बीच ऐसी रिपोर्टें सामने आई हैं कि बीजेपी 2027 के चुनाव में बड़ी संख्या में मौजूदा विधायकों के टिकट काट सकती है। कुछ रिपोर्टों में यह संख्या करीब 200 सीटिंग विधायकों तक बताई गई है। हालांकि, अभी पार्टी की ओर से 200 विधायकों के टिकट काटने की कोई आधिकारिक सूची जारी नहीं की गई है। आइए विस्तार से समझते हैं...
UP Chunav 2027: Vinod Tawde को यूपी की जिम्मेदारी क्यों?
बीजेपी ने उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और राजनीतिक रूप से निर्णायक राज्य की चुनावी कमान विनोद तावड़े को ऐसे समय सौंपी है, जब पार्टी 2027 की तैयारी को संगठनात्मक स्तर पर तेज करना चाहती है। तावड़े को चुनावी रणनीति और संगठन प्रबंधन का अनुभव है। इससे पहले बिहार चुनाव में भी उनकी भूमिका को पार्टी के प्रदर्शन से जोड़कर देखा गया था। अब यूपी में उनके सामने पार्टी को सत्ता की हैट्रिक दिलाने की चुनौती है।
तावड़े की नियुक्ति को केवल एक संगठनात्मक बदलाव के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसके पीछे बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने, कमजोर सीटों की पहचान करने और मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन की समीक्षा जैसे कई लक्ष्य माने जा रहे हैं।
यूपी में बीजेपी के कितने सीटिंग विधायक हैं?
2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से 255 सीटें जीती थीं। बीजेपी के सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) ने 12 और निषाद पार्टी ने 6 सीटें जीती थीं। इस तरह बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए ने कुल 273 सीटों पर जीत दर्ज की थी। हालांकि, 2022 के बाद कुछ सीटों पर उपचुनाव, दल-बदल और अन्य राजनीतिक बदलाव हुए हैं। इसलिए मौजूदा विधानसभा में बीजेपी के विधायकों की संख्या को 2022 के चुनावी आंकड़े से सीधे जोड़ना सही नहीं होगा। चुनाव से पहले पार्टी के टिकट वितरण का आधार केवल यह नहीं होगा कि विधायक ने पिछली बार चुनाव जीता था या नहीं, बल्कि उसकी मौजूदा लोकप्रियता, संगठन के साथ तालमेल और क्षेत्र में पकड़ जैसे कई मानकों पर फैसला हो सकता है।
200 विधायकों के टिकट कटने की चर्चा कितनी सही?
बीजेपी के टिकटों में बड़े पैमाने पर बदलाव की चर्चा के बीच 200 सीटिंग विधायकों के टिकट काटे जाने का दावा फिलहाल रिपोर्टों और राजनीतिक चर्चाओं पर आधारित है, आधिकारिक घोषणा नहीं। बताया जा रहा है कि पार्टी संभावित उम्मीदवारों का आकलन कई स्तरों पर कर सकती है। इनमें आंतरिक सर्वे, स्थानीय संगठन की रिपोर्ट, विधायक की क्षेत्र में सक्रियता, जनता के बीच छवि और चुनावी जीत की संभावना जैसे पहलू शामिल हो सकते हैं। यानी टिकट कटने का फैसला केवल विधायक के पिछले चुनावी प्रदर्शन पर नहीं, बल्कि 2027 में उसकी जीत की संभावना पर केंद्रित हो सकता है।
Keshav Prasad Maurya ने भी बड़े संकेत दिए
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी मौजूदा विधायकों के टिकट को लेकर संकेत दिए हैं। उनके मुताबिक, हर चुनाव में बड़ी संख्या में मौजूदा विधायकों के टिकट कटते हैं और नए चेहरों को मौका मिलता है। लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसका टिकट कटेगा और किसे दोबारा मौका मिलेगा, इसका फैसला केवल प्रदेश नेतृत्व नहीं करता।
मौर्य ने कहा कि बीजेपी का आंतरिक सर्वे सार्वजनिक नहीं होता और टिकट वितरण का अंतिम फैसला पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व करता है। उनके इस बयान को यूपी में बड़े पैमाने पर टिकट बदलाव की अटकलों से जोड़कर देखा जा रहा है।
किन विधायकों के टिकट कट सकते हैं?
फिलहाल, बीजेपी ने किसी भी विधायक का नाम आधिकारिक तौर पर घोषित नहीं किया है। इसलिए किसी खास विधायक को संभावित रूप से टिकट कटने वालों की सूची में रखना जल्दबाजी होगी। हालांकि, पार्टी की संभावित रणनीति को देखते हुए उन विधायकों की समीक्षा अधिक सख्ती से हो सकती है जिनके खिलाफ क्षेत्र में लंबे समय से नाराजगी की शिकायतें हैं, जिनका संगठन के स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ तालमेल कमजोर है या जिनकी जनता के बीच सक्रियता कम मानी जाती है।
इसके अलावा उम्र, लगातार दो बार चुनाव जीतने के बाद पैदा हुई स्थानीय एंटी-इनकंबेंसी, जातीय समीकरण और नए सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व देने की जरूरत भी टिकट वितरण में भूमिका निभा सकती है।
2024 Lok Sabha Elections से बीजेपी ने क्या सबक लिया?
2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश बीजेपी के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। बीजेपी 2019 के मुकाबले काफी पीछे रह गई, जबकि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन ने बेहतर प्रदर्शन किया। एसपी ने 37 और कांग्रेस ने 6 लोकसभा सीटें जीतीं, यानी दोनों दलों ने मिलकर 43 सीटें हासिल कीं।
इस चुनाव में बीजेपी के सामने एक अहम फीडबैक यह भी आया कि कई क्षेत्रों में मतदाता केंद्र और राज्य सरकार के काम से अलग अपने स्थानीय सांसद के प्रदर्शन को लेकर नाराज थे। यही वजह है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी स्थानीय स्तर पर एंटी-इनकंबेंसी को नजरअंदाज करने के मूड में नहीं दिख रही है।
BJP का मास्टर प्लान क्या है? 4 Point में समझें...
Point-1: कमजोर सीटों की पहचान-: पार्टी उन विधानसभा क्षेत्रों पर विशेष फोकस कर सकती है जहां संगठन या विधायक की स्थिति कमजोर है।
Point-2: मौजूदा विधायकों का रिपोर्ट कार्ड-: सिर्फ चुनाव जीतने के बजाय क्षेत्र में सक्रियता, जनता से संपर्क और संगठन के साथ संबंधों को भी महत्व दिया जा सकता है।
Point-3: नए चेहरों पर दांव-: बड़े पैमाने पर टिकट बदलाव की स्थिति में पार्टी एंटी-इनकंबेंसी को कम करने के लिए नए और अपेक्षाकृत साफ छवि वाले चेहरों को मैदान में उतार सकती है।
Point-4: सामाजिक समीकरण-: यूपी की जातीय और क्षेत्रीय राजनीति को देखते हुए उम्मीदवार चयन में अलग-अलग सामाजिक समूहों के प्रतिनिधित्व का संतुलन साधना बीजेपी के लिए अहम होगा।
क्या 200 टिकट कटेंगे?
यही 2027 के चुनाव से पहले बीजेपी की सबसे बड़ी चर्चाओं में से एक है। अगर पार्टी वास्तव में करीब 200 मौजूदा विधायकों के टिकट काटती है, तो यह 403 सदस्यीय विधानसभा के मुकाबले बेहद बड़ा बदलाव होगा। लेकिन अभी इस संख्या को पार्टी का अंतिम फैसला नहीं, बल्कि रिपोर्टों में सामने आया संभावित आंकड़ा मानना ही उचित है।
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