रूस ने 25 साल में पहली बार अपने केंद्रीय बैंक के रिजर्व से 14 टन सोना बेचा है, जिससे उसका गोल्ड रिजर्व 4 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। यह फैसला बढ़ते बजट घाटे और सैन्य खर्च के दबाव के कारण लिया गया है।
*सोना बेचने के कारण:*
- *बजट घाटा:* रूस का बजट घाटा बढ़कर GDP का 2.6% हो गया है।
- *सैन्य खर्च:* यूक्रेन युद्ध के कारण रूस का सैन्य खर्च बढ़ गया है।
- *तेल आय में गिरावट:* तेल की कीमतों में गिरावट और अमेरिका के प्रतिबंधों के कारण रूस की आय पर असर पड़ा है।
- *सोने की कीमत:* अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत $5,000 प्रति औंस के पार पहुंच गई है, जिससे रूस को अपने सोने की अच्छी कीमत मिल रही है।
रेगुलेटरी आंकड़ों के मुताबिक, 2022 से 2025 के बीच रूस ने सोना और विदेशी मुद्रा मिलाकर 15 ट्रिलियन रूबल (करीब 150 अरब डॉलर) से अधिक की बिक्री की. इसके अलावा, 2026 के पहले दो महीनों में ही 3.5 ट्रिलियन रूबल (करीब 35 अरब डॉलर) की अतिरिक्त बिक्री की गई. सिर्फ जनवरी 2026 में रूस के सेंट्रल बैंक ने 3 लाख औंस सोना बेचा, जबकि फरवरी में 2 लाख औंस की बिक्री हुई. ये कदम रिजर्व मैनेजमेंट में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है. पहले सोने के लेन-देन ज्यादातर कागजी होते थे. लेकिन, हाल के महीनों में सेंट्रल बैंक ने असली गोल्ड बार्स बाजार में बेचना शुरू कर दिया है.
इसका असर ये हुआ है कि रूस का कुल गोल्ड रिजर्व घटकर 74.3 मिलियन औंस रह गया है. ये पिछले चार साल का सबसे निचला लेवल है. जनवरी और फरवरी में कुल 14 टन सोने की बिक्री की गई. बता दें, 2002 की दूसरी तिमाही के बाद सबसे बड़ी दो महीने की बिक्री है. जब एक बार में 58 टन सोना बेचा गया था.
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