सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर श्रमिकों के न्यूनतम वेतन को लेकर फैल रही भ्रामक खबरों पर उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पष्ट रुख अपनाया है। सरकार ने कहा है कि 20 हजार प्रतिमाह न्यूनतम वेतन निर्धारित किए जाने की खबर पूरी तरह फर्जी और निराधार है।
सरकार की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि भारत सरकार द्वारा नई श्रम संहिताओं (लेबर कोड) के तहत राष्ट्रीय स्तर पर "फ्लोर वेज" तय करने की प्रक्रिया जारी है। इसका उद्देश्य देशभर में श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन की एक समान आधार रेखा सुनिश्चित करना है, ताकि सभी राज्यों में श्रमिकों को न्यायसंगत पारिश्रमिक मिल सके।
विज्ञप्ति में यह भी स्पष्ट किया गया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में न्यूनतम वेतन की दरें अधिसूचित की हैं। इसके तहत अकुशल श्रमिकों के लिए 11,313.65 मासिक (435.14 प्रतिदिन), अर्धकुशल श्रमिकों के लिए 12,446 मासिक (478.69 प्रतिदिन) तथा कुशल श्रमिकों के लिए 13,940.37 मासिक (536.16 प्रतिदिन) वेतन निर्धारित किया गया है।
सरकार ने बताया कि वर्तमान में नियोक्ता संगठनों और श्रमिक संगठनों सहित सभी संबंधित पक्षों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया जा रहा है। प्राप्त सुझावों और आपत्तियों की गंभीरता से समीक्षा कर संतुलित एवं व्यावहारिक निर्णय लिया जाएगा। साथ ही, आगामी समय में वेज बोर्ड के गठन के बाद उसकी सिफारिशों के आधार पर न्यूनतम वेतन निर्धारण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
प्रेस विज्ञप्ति में यह भी कहा गया कि मौजूदा समय में उद्योग जगत आर्थिक चुनौतियों से गुजर रहा है, वहीं श्रमिकों की समस्याएं और उनकी मांगें भी महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में सरकार दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाकर निर्णय लेने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने आमजन से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही अप्रमाणित सूचनाओं पर विश्वास न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी को ही सही मानें। उन्होंने नियोक्ता संगठनों से भी आग्रह किया है कि श्रमिकों को समय पर वेतन, ओवरटाइम भुगतान, साप्ताहिक अवकाश, बोनस और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े सभी अधिकार सुनिश्चित किए जाएं। साथ ही, कार्यस्थल पर महिला श्रमिकों की सुरक्षा और सम्मान का विशेष ध्यान रखा जाए। सरकार ने चेतावनी दी है कि भ्रामक खबरें फैलाने और अवैध गतिविधियों में संलिप्त तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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