- ईरान से लड़ाई के बीच ट्रंप ने शुरू किया एक और युद्ध! इस बार सीधे भारत से होगी जंग, बढ़ जाएगा दोहरा संकट | दैनिक सच्चाईयाँ

Friday, 3 April 2026

ईरान से लड़ाई के बीच ट्रंप ने शुरू किया एक और युद्ध! इस बार सीधे भारत से होगी जंग, बढ़ जाएगा दोहरा संकट

एक तरफ यूएस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इजराइल के साथ मिलकर ईरान से जंग करने में जुटे हुए हैं तो दूसरी तरफ उन्होंने फिर अपना वही हथियार निकाल डाला है, जिससे दुनियाभर की इकोनॉमी को गहरी चोट पहुंच सकती है.

असल में ट्रंप ने उन दवा कंपनियों के लिए नया टैरिफ प्लान पेश किया जो उनके "मोस्ट फैवर्ड नेशन" (Most Favored Nation) प्राइजिंग प्रोग्राम में शामिल नहीं हैं. इसके साथ ही उन्होंने मेटल इंपोर्ट पर भी नए और सख्त नियम लागू किए हैं.


ट्रंप की नई नीति के तहत कुछ इंपोर्टेड पेटेंट वाली दवाओं और उनके अहम इंग्रेडिएंट्स पर 100% टैरिफ लगाया गया है. इसका मकसद दवा कंपनियों को मजबूर करना है कि ताकि वे अपने प्रोडक्शन यूनिट को अमेरिका में ले आएं और अमेरिकी उपभोक्ताओं को दवाइयां कम कीमत पर उपलब्ध कराएं.


फार्मा कंपनियों पर दबाव बढ़ा

इन टैरिफ का असर कई फार्मा कंपनियों पर पड़ने वाला है. बड़ी दवा कंपनियों को इसका पालन करने के लिए 120 दिन का ही समय मिलेगा, जबकि छोटी कंपनियों को 180 दिन का समय दिया गया है. मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों का कहना है कि इसका मकसद देश में मेडिसिन प्रोडक्शन को तेज करना है. एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने कहा, "उन्हें पहले से चेतावनी मिल चुकी है और हम इसे लागू करने जा रहे हैं."


किन्हें मिली फार्मा टैरिफ से छूट?

हालांकि, इस आदेश में कई छूट भी ट्रंप ने दी है. नियमों के तहत जो कंपनियां प्राइजिंग प्रोग्राम में शामिल होंगी या अमेरिका में प्रोडक्शन यूनिट बनाने का वादा करेंगी, उन्हें टैरिफ में बड़ी छूट मिल सकती है या पूरी तरह टैरिफ से हटाया जा सकता है. जो कंपनियां प्रोडक्शन अमेरिका में ट्रांसफर करती हैं, उनके टैरिफ को 20 प्रतिशत तक घटाया जा सकता है.


इसके अलावा, जिन कंपनियों का ऑफिस पहले से मौजूद ट्रेड समझौतों वाले जगहों में है, जैसे यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया और स्विट्ज़रलैंड, तो उन्हें लगभग 15 प्रतिशत टैरिफ देना होगा. वहीं, यूके स्थित कंपनियों पर भी अलग टैरिफ लागू होगा.


ट्रंप सरकार के मुताबिक यूएस ने पहले ही एक दर्जन से ज्यादा दवा कंपनियों के साथ डील कर ली है. इन डील के तहत कंपनियों को दवाओं की कीमत कम करने और अमेरिका में निवेश करने के बदले कुछ समय के लिए टैरिफ में राहत दी जा रही है.


फार्मा कंपनियों के शेयर्स में हड़कंप

यह कदम ट्रंप की ट्रेड नीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है. खासकर इस साल की शुरुआत में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद, जिसमें उनके टैरिफ को अवैध घोषित कर दिया गया था. अब तक ज्यादातर मामलों में प्रिस्क्रिप्शन दवाओं को टैरिफ से बाहर रखा गया, लेकिन इस फैसले के साथ पहली बार फार्मा सेक्टर को बड़े स्तर पर इसमें शामिल किया गया है.


फार्मा कंपनियों पर भारी टैरिफ और मेटल आयात नियम सख्त करने के फैसले का असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ सकता है, जिससे कारोबार और निर्यात पर दबाव बढ़ने का खतरा है. वैश्विक तनाव के बीच भारत के लिए ये एक नया संकट होता नजर आ रहा है.


फार्मा कंपनियों पर 100 फीसदी टैरिफ की खबरों के बीच कल यानी 2 अप्रैल से ही भारतीय शेयर बाजार के कई सारी फार्मा कंपनियों के शेयर्स में भारी गिरावट भी देखने को मिली. सबसे ज्यादा असर सन फार्मा पर देखा गया, जिसके शेयर करीब 4-5% तक टूटकर 52 हफ्तों के निचले स्तर के करीब पहुंच गए. इसके अलावा Biocon, Lupin, Divi's Laboratories, Dr. Reddy's Laboratories, Cipla और Zydus Lifesciences जैसे बड़ी कंपनियों के शेयर्स में भी 2 से 4% तक की गिरावट देखने को मिली. ऐसे में निफ्टी फार्मा इंडेक्स भी करीब 2.5% नीचे फिसल गया. लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि भारत से अमेरिका को जो दवाएं भेजी जाती हैं, उनमें ज्यादातर हिस्सा जेनरिक दवाओं का होती है. ये सस्ती दवाएं होती हैं और अभी तक टैरिफ का फोकस ब्रांडेड और पेटेंट दवाओं पर ही है. इसलिए सीधे तौर पर सभी कंपनियों पर बड़ा असर पड़ने की संभावना कम मानी जा रही है.


मेटल इंपोर्ट के नियमों पर भी सख्ती

फार्मा सेक्टर के साथ-साथ ट्रंप ने स्टील, एल्यूमिनियम और कॉपर के आयात पर टैरिफ में बदलाव करने का आदेश भी दिया है. ट्रंप सरकार का कहना है कि यह कदम विदेशी निर्यातकों द्वारा की जा रही कीमतों में हेरफेर को रोकने के लिए उठाया गया है.


नए नियमों के तहत अब प्राइमरी मेटल पर लगने वाला 50% टैरिफ निर्यातकों द्वारा बताई गई कीमत के बजाय अमेरिका में खरीद कीमत के आधार पर तय किया जाएगा. इसके अलावा जिन प्रोडक्ट्स में धातु की मात्रा ज्यादा होती है, जैसे घरेलू सामान, उन पर 25% टैरिफ लगाया जाएगा. ऐसा तभी होगा जब उसमें मेटल तय सीमा से ज्यादा पाया जाता है.


हालांकि, बढ़ती कीमतों को लेकर चिंता जताई जा रही है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि इसका आम लोगों पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा और कीमतों में बदलाव सीमित रहेगा.

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