दहेज के लिए पत्नी की हत्या करने वाले इकरामुद्दीन को दोषी पाते हुए न्यायालय अपर जिला जज कोर्ट संख्या 20 अभिषेक उपाध्याय की अदालत ने आठ साल की सजा सुनाई। ने दहेज हत्या के आरोप में आरोपी पति इकरामुद्दीन पुत्र जमील निवासी ग्राम सिवाया मेरठ को दोषी पाते हुए 8 वर्ष के कारावास से दंडित किया।
मदीना कालोनी निवासी इकबाल 27 जुलाई 2016 को थाना दौराला में दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि उनकी बहन क्षमा का निकाह वर्ष 2011 में इकरामुद्दीन के साथ हुआ था। विवाह के बाद से ही आरोपित पति और उसके घर वाले दहेज को लेकर क्षमा का उत्पीड़न करने लगे थे।
दहेज न दिए जाने के कारण कई बार उसे मारने की धमकी दी गई। 27 जुलाई 2016 की रात 11 बजे मायके पक्ष के लोगों को सूचना मिली कि क्षमा की हत्या कर फांसी पर लटका दिया। पीड़ित पक्ष की तहरीर पर मुकदमा दर्ज हुआ।
विवेचना के बाद पुलिस ने आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल कर दिया। न्यायालय में कुल 10 गवाह पेश किए। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद अदालत ने इकरामुद्दीन को दोषी पाते हुए आठ साल की सजा सुना दी।
दुष्कर्म के आरोप में आरोपित हुआ दोष मुक्त
अदालत ने दुष्कर्म के आरोप में जबर सिंह को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। आरोपित की अधिवक्ता बालेंद्र कुमार ने बताया की थाना कंकरखेड़ा पर नौ अगस्त 2023 को जबर सिंह के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया था। पीड़ित का कहना था कि उनकी बेटी की शादी 2021 में निशांत पुत्र जबर सिंह निवासी कंकरखेड़ा से हुई थी।
आरोप था कि ससुर जबर सिंह ने अकेली पाकर पीडि़ता से दुष्कर्म कर लिया। मुकदमा होने के बाद न्यायालय में आरोपित के निर्दोष होने के साक्ष्य पेश किए और मुकदमे में कुल सात गवाह से जिरह की। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनकर तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए दोष मुक्त कर दिया।
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