इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बिजनौर में एनआइए के डिप्टी सुपरिटेंडेंट तंजील अहमद तथा उनकी पत्नी फरजाना की हत्या मामले में अभियुक्त रैयान की फांसी की सजा रद कर दी है और अपराध से बरी करने के साथ ही तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने अभियोजन का मामला संदेहों से भरा पाया। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ की एकलपीठ ने कहा, ट्रायल कोर्ट ने अपीलार्थी को फांसी की सजा देने में गंभीर गलती की है। यह अदालत मानती है कि ट्रायल कोर्ट द्वारा पारित निर्णय और आदेश को रद किया जाना चाहिए। रैयान सात अप्रैल 2016 से जेल में है। कोर्ट ने कहा, अभियोजन के गवाहों का संदिग्ध आचरण स्पष्ट नहीं हुआ है।
जिस अधिकारी व उनकी पत्नी की हत्या की गई, वह कई हाई प्रोफाइल मामलों की जांच कर रहे थे, जो राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित थे। इसमें आतंकवाद के मामले भी शामिल थे। पुलिस ने घटनास्थल पर महीनों तक डेरा डाला ताकि मामले को सुलझाया जा सके।
आसपास के कई व्यक्तियों को कई दिनों तक हिरासत में रखा, जैसा दो गवाहों ने स्वीकार किया, लेकिन कोई विश्वसनीय सुराग नहीं मिला। इसी मामले में अभियुक्त मुनीर (अपील लंबित रहने के दौरान 12 दिसंबर 2023 को उसकी मौत हो गई ) स्थानीय अपराधी था।
रैयान को उसके गिरोह का सदस्य बताया गया। मोहम्मद तंजील के भाई मोहम्मद राघिब मसूद ने तीन अप्रैल 2016 को थाना सेओहारा, बिजनौर में रात 1:20 बजे घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने 22 मई 2022 को मौत की सजा सुनाई थी।
एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। हालांकि जब मामला हाई कोर्ट में आया तो दो न्यायमूर्तियों राजीव गुप्ता तथा हरवीर सिंह की राय अलग-अलग थी। एक न्यायमूर्ति ने रैयान को बरी करने का फैसला दिया, जबकि दूसरे ने उसकी सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया।
प्रकरण मुख्य न्यायमूर्ति के पास संदर्भित कर दिया गया। इसके बाद न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने प्रकरण में सुनवाई की। अभियोजन के अनुसार वादी मुकदमा की भतीजी का विवाह कास्बा सेओहारा के बंधन बैनक्वेट हाल में हो रहा था। इसमें उनके भाई, भाभी, भतीजी जिमनिश और भतीजे शाहबाज भी शामिल होने पहुंचे थे।
विवाह के बाद उनके भाई वैगन आर कार में पत्नी, बेटी और बेटे के साथ विवाह स्थल से निकल गए। वह भी दूसरी कार में परिवार के साथ थे। रात एक बजे के आसपास साहसपुर की ओर तालकटोरा नाले के पास दो व्यक्ति मोटरसाइकिल पर वहां पहुंचे और मोटरसाइकिल को कार के पास रोक दिया।
मोहम्मद तंजिल और फरजाना पर फायरिंग शुरू कर दी। शोर मचाए जाने पर हमलावर भाग निकले। अभियोजन हत्या में आरोपी के लिप्त होने का पुख्ता सुबूत नहीं जुटा सका। कोर्ट ने कहा कि सत्र अदालत ने साक्ष्यों को समझने में गलती की।
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