मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छठवीं उत्तर प्रदेश कृषि विज्ञान कांग्रेस-2026 को संबोधित करते हुए कहा कि पहले किसान सिर्फ खेती तक सीमित नहीं था, बल्कि वह कारीगर और उद्यमी भी था.
आक्रांताओं ने भारत की खेती के साथ-साथ उद्यमिता पर भी हमला किया, जिससे उत्पादक किसान कर्जदार बन गया और उद्यमी कारीगर भी कर्ज के बोझ तले दब गया. सीएम योगी ने वन्देमातरम गीत का जिक्र करते हुए कहा कि यह गीत बंगाल की त्रासदी और सन्यासी विद्रोह के बाद की गाथा पर आधारित है. उन्होंने जोर दिया कि आज इन ऐतिहासिक बिंदुओं पर चर्चा की जरूरत है, ताकि कृषि की सम्भावनाओं को जमीन पर उतारा जा सके और दुनिया को आकर्षित किया जा सके.
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक साजिश के तहत गांवों की आत्मनिर्भर इकाई को भंग किया गया. उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि 'खेती की बात खेत पर' कार्यक्रम के दौरान उन्होंने एक किसान को देखा, जो मक्के की एक एकड़ खेती से एक लाख रुपये का मुनाफा कमा रहा था. पहले कृषि सुविधाओं की भारी कमी थी, लेकिन 2017 के बाद कृषि विज्ञान केंद्रों में हर सप्ताह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. सरकार ने कृषि और खेती को एजेंडा बनाया है. पहले उत्तर प्रदेश में 10-10 वर्ष तक गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं होता था, लेकिन आज प्रदेश देश का 55 प्रतिशत गन्ना उत्पादन करता है और एथनॉल उत्पादन में भी नंबर-1 है. 122 चीनी मिलों में से 107 मिलें अब 6-7 दिनों में भुगतान कर रही हैं. नई मिलें लगाने के लिए आने वाले निवेशकों को फिलहाल रोका जा रहा है, ताकि व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सके.
किसान आय और कल्याण
सीएम योगी ने कहा कि 2014 से पहले देश में किसान आत्महत्या कर रहे थे, लेकिन आज उत्तर प्रदेश में एक भी किसान आत्महत्या नहीं कर रहा. पहले किसानों को सरकार पर भरोसा नहीं था, उनका शोषण होता था और वे सिर्फ चुनावी मुद्दा बनकर रह जाते थे. बिचौलियों के हावी होने से किसानों को मजबूरन आत्महत्या का रास्ता चुनना पड़ता था. आज सरकार किसानों को उनकी लागत से डेढ़ गुना अधिक दाम दे रही है. सिंचाई के लिए फ्री बिजली और पानी उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसके लिए UPPCL को हर वर्ष 3 हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया जाता है. किसानों को सोलर पैनल से जोड़ने का प्रयास जारी है. सरयू नहर परियोजना के तहत 14 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई सुनिश्चित की गई है. जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा के लिए सोलर फेंसिंग दी जा रही है. हर गाय के भरण-पोषण के लिए 1500 रुपये प्रति माह दिए जा रहे हैं.
आपदा प्रबंधन पर फोकस
मुख्यमंत्री ने आज सुबह ही असमय बारिश और ओलावृष्टि से हुए नुकसान पर उच्च स्तरीय बैठक की. उन्होंने अधिकारियों को व्यापक योजना बनाने के निर्देश दिए. किसी भी आपदा में जनहानि पर 24 घंटे के अंदर 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता, पशु हानि की तत्काल भरपाई और आंधी, अग्निकांड या आपदा से प्रभावितों को तत्काल आवास उपलब्ध कराने के सख्त निर्देश दिए गए हैं. उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष एक दिन में उत्तर प्रदेश और बिहार में 90 लोगों की मौत हुई थी, लेकिन अब सोनभद्र में अर्ली वार्निंग सिस्टम के पायलट प्रोजेक्ट से बिजली गिरने से होने वाली मौतें 30 से घटकर 1-2 रह गई हैं.
भविष्य की दिशा
सीएम योगी ने जोर दिया कि उत्पादन के साथ पोषण बढ़ाना चुनौती है. कम लागत में उत्पादन बढ़ाने, कृषि को टेक्नोलॉजी और डेटा से जोड़ने पर चर्चा जरूरी है. ड्रोन से छिड़काव, सैटेलाइट से भूमि और मौसम की निगरानी, AI और बायोटेक्नोलॉजी का उपयोग कर जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बीज विकसित करने की जरूरत है. मंडी शुल्क खत्म कर दिया गया है. अब 'लैब टू लैंड' नहीं, बल्कि 'लैब इन लैंड' की अवधारणा अपनानी होगी, यानी खेत ही प्रयोगशाला बने. प्राकृतिक खेती को एक मात्र विकल्प बताते हुए उन्होंने कहा कि कुछ लोगों की नकारात्मक प्रवृत्ति के कारण प्रकृति भी प्रभावित होती है.
प्रदेश में वर्तमान में 89 कृषि विज्ञान केंद्र कार्यरत हैं. सीएम ने कहा कि यदि KVK सक्रिय रहेंगे तो सभी को लाभ मिलेगा. किसान खुशहाल होगा तो देश और समाज भी खुशहाल होगा.
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