- UP के 32 जिलों की 140 सीटों पर SP की नजर! क्या है अखिलेश यादव की दादरी रैली के मायने? जानें | दैनिक सच्चाईयाँ

Sunday, 29 March 2026

UP के 32 जिलों की 140 सीटों पर SP की नजर! क्या है अखिलेश यादव की दादरी रैली के मायने? जानें

उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज होने वाली है. समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव ने 2027 के आगामी चुनाव को लेकर कमर कस ली है. इसके लिए वह आज यानी 29 मार्च को दादरी के मिहिर भोज डिग्री कॉलेज के मैदान में बड़ी रैली करने वाले हैं.

सपा खुद इस रैली को 2027 विधानसभा चुनाव का 'शंखनाद' बता रही है. आइए जानते हैं आखिर दादरी रैली के मायने क्या हैं? क्या वाकई 140 विधानसभा सीटों पर सपा की नजर है? पश्चिमी यूपी में सपा का प्रदर्शन कैसा रहा है?

यह है दादरी रैली का लक्ष्य!

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव करीब सुबह 12 बजे यहां पहुंचेंगे. यहां हजारों समर्थकों के जुटने की उम्मीद है. सपा मुखिया रैली से पहले गुर्जर प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा पर माल्यापर्ण भी करेंगे. इसके बाद भी मंच से जनसभा को संबोधित करेंगे. कार्यक्रम के लिए करीब 100 मीटर लंबा पांडाल तैयार किया गया है. इस रैली के जरिए समाजवादी पार्टी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 32 जिलों के करीब 140 विधानसभा सीटों पर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने का संदेश देना चाहती है. इसके पीछे की वजह यह भी है कि गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद जैसे शहरी इलाके बीजेपी के मजबूत गढ़ माने जाते हैं. इसलिए यहां से रैली सपा के लिए महत्वपूर्ण है. इस रैली को कामयाब बनाने के लिए सपा पदाधिकारी पिछले 8 महीने से तैयारी कर रहे हैं.

यहां से आएंगे लोग

इस रैली में गाजियाबाद, बुलंदशहर, मेरठ, संभल, शामली, बागपत, नोएडा और ग्रेटर नोएडा समेत के जिलों से बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने का दावा है. पार्टी नेताओं का कहना है कि यह रैली सामाजिक एकता और भाईचारे को संदेश देगी. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पश्चिमी यूपी की 140 विधानसभा सीटें यूपी की सत्ता तय करने में गेमचेंजर मानी जाती हैं. 32 जिलों में फैला यह क्षेत्र जातीय और धार्मिक समीकरणों का सबसे बड़ा केंद्र है. जाट, गुर्जर, मुस्लिम और पिछड़ा वर्ग यहां चुनावी नतीजों को सीधे प्रभावित करते हैं. ध्रुवीकरण बनाम गठबंधन- यही यहां जीत-हार का सबसे बड़ा फैक्टर रहता है.

नहीं लड़ूगा इस बार चुनाव: राजकुमार भाटी

राष्ट्रीय प्रवक्ता सपा और रैली संयोजक राजकुमार भाटी का कहना है कि तीन संदेश देना चाहते हैं. पहले तो यह कि जब 2011 में पश्चिमी यूपी से प्रचार की शुरुआत की थी तो 2012 में हमारी सरकार बनी थी. वेस्ट यूपी में हमें कमजोर माना जाता है. जन विरोधी नीतियों से जनता परेशान है और जल्दी से जल्दी छुटकारा चाहती है. पीडीए के नारे से जनता जुड़ रही है. उन्होंने कहा कि वर्तमान में जितना कानून व्यवस्था खराब है उतना कभी खराब नहीं हुआ. एनसीआरबी के आंकड़े आप उठा कर देख लीजिए. डेढ़ गुना ज्यादा क्राइम है. बुलडोजर सिर्फ विध्वंस करता है. हमने जानबूझकर प्रतिमा लगाई है. उन लोगों को संदेश देना चाहते हैं जिन्होंने मिहिर भोज की प्रतिमा पर कालिख पोती थी. मैं 2022 में भी चुनाव लड़ा था. 2017 में भी चुनाव लड़ा था और इस बार मैंने तय किया है चुनाव नहीं लड़ूंगा और 140 सीटों पर प्रचार करने जाऊंगा.

2022 में कैसा रहा था प्रदर्शन?

2022 विधानसभा चुनाव में 140 में से 96 सीटों के विश्लेषण की बात करें तो सपा-रालोद के हाथ करीब 36 सीटें आई थीं. तब रालोद के सपा का गठबंधन था. सपा होने वाली इस रैली को केवल भीड़ जुटाने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि भाजपा सरकार के खिलाफ माहौल बनाने का बड़ा मंच मान रही है. पार्टी पदाधिकारियों का कहना है कि प्रदेश का हर वर्ग मौजूदा शासन से नाराज है. रैली में सरकार की नाकामियों को प्रमुखता से उठाया जाएगा.

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