- Meerut: मरीजों के लिए नेपाल, बिहार और झारखंड से मंगाया जा रहा खून | दैनिक सच्चाईयाँ

Monday, 6 April 2026

Meerut: मरीजों के लिए नेपाल, बिहार और झारखंड से मंगाया जा रहा खून

शॉक्ड रह गए डोनरपिछले दिनों दीक्षा ने एक एनजीओ की ओर से ऑर्गनाइज कैंप में ब्लड डोनेट किया था। रक्तदान करके वह काफी खुश थी। वह एक प्रोफेशनल है। दिल्ली की एक बड़ी कंपनी में जॉब करती है।

ऐसे में जब कभी उसे टाइम मिलता है तो वह अपने फ्रेंड्स के साथ ब्लड डोनेट करती है। साथ ही दूसरों को भी ब्लड डोनेट करने के लिए प्रेरित करती है। बीते दिनों जब उसने खबर पढ़ी कि कुछ चैरिटेबल ब्लड बैंक अपने यहां स्टोर ब्लड को बेच रहे हैं। तो वह शॉक्ड रह गई। वह ब्लड डोनेट करने से पहले कई बार सोचती है कि उसकी इस चैरिटी का गलत उपयोग तो नहीं होगा।

केस टू : ब्लड डोनेशन बना बिजनेस मॉडल

रक्षित एक आईटी कंपनी में जॉब करता है। वह भी एक एनजीओ से जुड़ा है। अक्सर वह अपने दोस्तों के साथ शहर और देहात के क्षेत्रों में ब्लड डोनेट कैंप ऑर्गनाइज्ड करता है। यही नहीं, वह आसपास के लोगों को भी रक्तदान के लिए जागरूक करता है। ऐसे में जब उसने सुना कि कुछ चैरिटेबिल ट्रस्ट ब्लड बैंक की आड़ में गोरखधंघा चला रहा है। अब वह भी ब्लड डोनेट करने से हिचकने लगा है। वह भी यही सोचता है कि उसके परोपकार को कुछ लोग बिजनेस मॉडल तो नहीं बना लेंगे।

मेरठ (ब्यूरो)। कहते हैं कि रक्तदान सबसे बड़ा दान होता है। अगर आप किसी को अपना खून देकर उसकी जिंदगी बचाते हैं तो जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि होती है, पर आप यह खबर सुनकर चौंक जाएंगे कि आपके इसी परोपकार को कुछ लोगों ने बिजनेस मॉडल बना लिया है। आपके डोनेट ब्लड को कुछ चैरिटेबल ट्रस्ट मनमाने दामों पर बेच रहे हैं। यही नहीं, चैरिटेबिल ट्रस्ट कुछ पेशेवर रक्तदाताओं से ब्लड कलेक्ट करके उसे मनमाने दाम पर बेचते हैं। इसका खुलासा होने पर एफएएसडीए ने सख्ती कर दी है। अब ऐसे कई चैरिटेबिल ब्लड बैंक का रिकार्ड खंगाला जा रहा है। शहर के दो चैरिटेबिल ब्लड का लाइसेंस तक निरस्त कर दिया गया है। आखिर चैरिटेबिल ट्रस्ट कैसे खेलते ब्लडी गेम, पढ़िए इस अंक में...

कैसे जा रहा है खेल

शहर में ब्लड कैंप की आड़ में खेल चल रहा है। चोरी-छिपे पेशेवर ब्लड डोनर से चैरिटेबिल ट्रस्ट ब्लड कलेक्ट कराते हैं। इसके बाद उसे मनमाने दाम पर बेच देते हैं। यह सारा खेल ब्लड कैंप की आड़ में चल रह है। दरअसल, निजी ब्लड बैंकों को कैंप लगाने से पहले सीएमओ से अनुमति लेनी पड़ती है। चैरिटेबिल ट्रस्ट के इस खेल को देखते हुए सीएमओ ऑफिस ने अभी निजी ब्लड कैंप को कैंप लगाने की परमिशन नहीं दी है। हैरानी की बात यह है कि फिर ब्लड की निर्बाध आपूर्ति हो रही है। ऐसे में अब एफएएसडीए ने चेरिटेबल ब्लड बैंकों का रिकार्ड खंगालना शुरु कर दिया। शहर के दो चैरिटेबिल ब्लड बैंक का लाइसेंस तक निरस्त हो चुका है।

ब्लड डोनर का मांग रहे रिकार्ड

खून के इस खेल को रोकने के लिए एफएसडीए ने सख्त कार्रवाई की है। इसके तहत शहर के निजी ब्लड बैंकों से खून की निर्बाध आपूर्ति पर शिकंजा कसा है। लिहाजा ऐसे ब्लड बैंकों का रिकार्ड खंगालना शुरू कर दिया है। इसमें सेंटर के ब्लड स्टोरेज का तापमान, खून की जांच प्रक्रिया, स्टाफ की उपलब्धता को खंगाला गया। इसके साथ ही मशीनों की हालत और रिकॉर्ड की जांच के साथ-साथ ब्लड डोनर का पूरा रिकार्ड तलाशा जा रहा है। एफएसडीए ने सभी निजी ब्लड बैंकों को नोटिस भेजा है। उनके यहां ब्लड की आपूर्ति कहां से हो रही है। इसका रिकार्ड भी मांगा जा रहा है। इससे निजी ब्लड बैंकों में खलबली मची है। इस जांच में ब्लड बैंकों से ब्लड कैंप के बारे में जानकारी इकट्ठा की जा रही है।

दो चैरिटेबिल ब्लड सेंटर पर गाज

इस दौरान एफएसडीए ने शहर के 18 से अधिक ब्लड बैंक का रिकार्ड चेक किया। इस दौरान टीम को लिटिल स्टार चैरिटेबिल ट्रस्ट और लाइफ लाइन चैरिटेबिल ब्लड सेंटर में अनियमितताएं मिलीं, लिहाजा इन दोनों सेंटर पर तत्काल रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही सिटी के छह से अधिक ब्लड बैंक विभाग की रडार पर हैं। इनका सही रिकार्ड विभाग को नहीं मिल पा रहा है। इस दौरान यूपी के 42 ब्लड बैंकों का रिकार्ड खंगाला गया है। इनमें सबसे अधिक 18 मेरठ के ब्लड बैंक भी शामिल हैं। इनमें मेरठ के 18, गाजियाबाद के 11, बुलंदशहर के 5, बागपत के 1, गौतमबुद्धनगर के 1, बनारस के 6 सेंटरों की जांच की गई।

पेशेवर ब्लड डोनर का खेल

सूत्रों की मानें तो शहर के अधिकतर चैरिटेबल ब्लड बैंक में पेशेवर रक्तदाताओं के सहारे चल रहे हैं। इन ब्लड बैंक में दूसरे राज्यों खासतौर पर बिहार, झारखंड से ब्लड आता है। इसके बाद मनमाने दामों पर जरूरतमंदों को उपलब्ध कराया जाता है। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई कि दूसरे राज्य के पेशेवर रक्तदाता ही कैंप के माध्यम से चैरिटेबल ब्लड बैंक को खून दे रहे थे। जिन राज्यों से खून की आपूर्ति हो रही थी, वहां पहले बड़े स्तर पर रक्तदान शिविर लगाए जाते थे, फिर एकत्र ब्लड को इन सेंटरों पर लाकर बेचा जाता है। खून की दलाली का खेल सामने आने के बाद विभाग ने जांच शुरु कर दी है। ड्रग विभाग लगातार निजी ब्लड बैंकों को भी पत्र भेजकर उनके यहां खून का स्टॉक व मंगाए जाने का रिकॉर्ड एकत्र कर रहा है।


इन पाइंट पर हो रही जांच

ब्लड स्टोरेज का तापमान

खून की जांच प्रक्रिया

स्टाफ की उपलब्धता

मशीनों की हालत और रिकॉर्ड की जांच

खून देने और लेने वालों का पूरा रिकॉर्ड

जरूरी एलाइजा टेस्ट सुविधा

खून रखने की ठंडी व्यवस्था (कोल्ड चेन)

डॉक्टर और तकनीकी स्टाफ उपलब्धता


मुख्यालय के आदेश पर कई मानकों पर ब्लड बैंक की जांच की जा रही है। कई मानकों पर जांच चल रही है। दो सेंटर को तत्काल प्रभाव से बंद करा दिया गया है। इसमें खून देने वालों का रिकार्ड भी खंगाला जा रहा है।

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